दिल से दिल तक

September 11, 2007

बादे बाहर आई, ख़ुश्बू खुमार लाई

Filed under: ग़ज़ल — Devi Nangrani @ 11:38 pm

गज़लः 1

बादे बाहर आई, ख़ुश्बू खुमार लाई
ख़ुशियों का है ये मौसम, परिवार को बधाई.

 

कोयल की कूक प्यारी, भंवरों की गुनगुनाहट
उनसे चुराके सरगम, ये धुन मधुर बनाई.

 

चंचल सी एक तितली, चूमे सुमन सुमन को
शर्माके हर कली भी, जाने क्यों खिलखिलाई.

 

बरसात भीनी भीनी, उसपर घनी घटायें
शबनम की ओस जैसे, मन को भिगोने आई.

 

गुलज़ार महके देवी, दिल दिल को है दुआईं
मंथन किया जो मन का अनुभूति एक पाई.१२१

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