ग़ज़लः 31
चमन में रहके खारों से उलझना भी बहुत मुश्किल
बिना उलझे गुलों की बू को पाना भी बहुत मुश्किल.
किसी के नाज़ नखरों को उठाना तो नहीं आसान
अगर आईना टूटा हो तो सजना भी बहुत मुश्किल.
किसे बर्बाद करके क्या कोई आबाद होता है
सुकूँ को दाव पर रखके है जीना भी बहुत मुश्किल.
गले में झूठ का पत्थर फँसा है इस तरह जिसको
उगलना भी बहुत मुश्किल, निगलना भी बहुत मुश्किल.
न छोड़ी चोर ने चोरी, न डसना साँप ने देवी
ये फ़ितरत है तो फ़ितरत को बदलना भी बहुत मुश्किल.१९४
गज़लः 30
आग ऐसी लगा गया कोई
दामने-दिल जला गया कोई.
मेरी आँखों क पोंछ कर आँसू
अपना दामन भिगा गया कोई.
इक दफ़ा मेरे ख्वाब में आकर
सारी नीडें उड़ा गया कोई.
हौसला वर-शगुफ़्तगू करके
आस मेरी बंधा गया कोई.
ख़ैरियत मेरी पूछकर देवी
कर्ब़ दिल का बड़ा गया कोई.१७५
गजलः 29
कसमासाता बदन रहा मेरा
छू के दामन गई हवा मेरा.
मुझको लूटा था बस खिज़ाओं ने
है गुले दिल हरा भरा मेरा.
तन्हा मैं हूँ और तन्हा राहें भी
साथ तन्हाइयों से रहा मेरा.
खोई हूं इस कदर जमाने में
पूछती सबसे हूँ पता मेरा.
आईना क्यों कुरूप इतना है
देख उसे अक्स डर रहा मेरा.
मैं अंधेरों से आ गई बाहर
जब से दिल और घर जला मेरा.
जिसने भी दी दुआ मुझे देवी,
काम आसान हो गया मेरा.१७२