दिल से दिल तक

October 30, 2007

छू के दामन गई हवा मेरा

Filed under: ग़ज़ल — Devi Nangrani @ 1:37 am

गजलः 29

कसमासाता बदन रहा मेरा
छू के दामन गई हवा मेरा.
मुझको लूटा था बस खिज़ाओं ने
है गुले दिल हरा भरा मेरा.
तन्हा मैं हूँ और तन्हा राहें भी
साथ तन्हाइयों से रहा मेरा.
खोई हूं इस कदर जमाने में
पूछती सबसे हूँ पता मेरा.
आईना क्यों कुरूप इतना है
देख उसे अक्स डर रहा मेरा.
मैं अंधेरों से आ गई बाहर
जब से दिल और घर जला मेरा.
जिसने भी दी दुआ मुझे देवी,
काम आसान हो गया मेरा.१७२

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