दिल से दिल तक

अक्टूबर 2, 2007

जो पत्थर से टकराएंगे

Filed under: ग़ज़ल-दिल से दिल तक — Devi Nangrani @ 5:45 अपराह्न

गज़लः 9
जो पत्थर से टकराएंगे
फूलों से क्या घबराएंगे.

जो रिश्ते दुख की थपकी दें
लोरी से क्या सो पाएंगे.

है घाव कहां, है दर्द कहां
किस किस को हम बतलाएंगे.

मन मीत बनाकर गर्दिश को
मिलकर सदमें सह जाएंगे.

तेरे झूठे वादे देवी
दिल को कब तक बहलाएंगे.

नफरत की पलकों पर कश्ती
कब प्यार से पार लगाएंगे.156

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4 टिप्पणियाँ »

  1. जो रिश्ते दुख की थपकी दें
    लोरी से क्या सो पाएंगे.
    BAHUT ACHCHI JAGAL

    टिप्पणी द्वारा Ashok Madhup — नवम्बर 5, 2007 @ 5:22 अपराह्न

  2. Ashok ji

    Bin uski marzi ke kya hum
    Ik shabd yahaan likh paayenge.

    kamnaon sahit

    Devi

    टिप्पणी द्वारा Devi Nangrani — दिसम्बर 24, 2007 @ 9:06 अपराह्न

  3. great .

    टिप्पणी द्वारा mukesh — जनवरी 7, 2008 @ 4:12 पूर्वाह्न

  4. aap bahut badhiya aur saral bhasha me apni bat kehti hai .

    टिप्पणी द्वारा mukesh , mumbai. india — जनवरी 7, 2008 @ 4:15 पूर्वाह्न


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