दिल से दिल तक

अक्टूबर 30, 2007

आग ऐसी लगा गया कोई

Filed under: ग़ज़ल-दिल से दिल तक — Devi Nangrani @ 1:39 पूर्वाह्न

गज़लः 30
आग ऐसी लगा गया कोई
दामने-दिल जला गया कोई.

 

मेरी आँखों क पोंछ कर आँसू
अपना दामन भिगा गया कोई.

 

इक दफ़ा मेरे ख्वाब में आकर
सारी नीडें उड़ा गया कोई.

 

हौसला वर-शगुफ़्तगू करके
आस मेरी बंधा गया कोई.

 

ख़ैरियत मेरी पूछकर देवी
कर्ब़ दिल का बड़ा गया कोई.१७५

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1 टिप्पणी »

  1. बहुत बढ़िया लगी आपकी ये गजल

    टिप्पणी द्वारा नीरज त्रिपाठी — मार्च 23, 2008 @ 12:54 अपराह्न


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